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उगते सूर्य के अर्घ्य के साथ चार दिवसीय महापर्व छठ संपन्न

बिक्रमगंज प्रखंड क्षेत्र में छठ पर्व ‌श्रद्धा के साथ धूम-धाम से मनाया गया। प्रतःकाल में व्रती महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उनकी और मां छठी मैया की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की और इसके बाद व्रत का पारण के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास तोड़ा।

 

इस मौके पर नोनहर सहित कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। सभी व्रती महिलाओं ने जगह-जगह घाटों पर अपनी आस्था की उपस्थिति दर्ज करवाई। चार दिनों तक चले पर्व छठ 17 नवंबर को नहाय खाय से शुरू हुआ था और 20 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की विधि के साथ पूर्ण रूप से संपन्न हुआ।

 

चार दिनों के चलने वाले इस पर्व में व्रती महिलाओं ने खरना के बाद से व्रत का संकल्प लिया। यह व्रत कुल 36 घंटे का होता है। बता दें कि, यह व्रत निर्जला रखा जाता है। आज इस व्रत का पारण कर महिलाओं ने छठ के प्रसाद के साथ अन्न-जल को ग्रहण किया।

 

छठ व्रत में छठी मैया और सूर्य भगवान को समर्पित होता है। मान्यता है कि छठी मैया निसंतान दांपतियों को संतान का वरदान देती हैं और घर की सुख – समृद्धी का भी आशीर्वाद देती है। इस वजह से महिलाएं छठ पर्व का व्रत रखती है।

 

जिससे उनकी संतान को दीर्घायु की प्राप्ति हो और जिनकी संतान नहीं हैं, उन विवाहित दंपतियों को संतान का सुख मिले। इस व्रत को पूरे नियम के साथ रखना चाहिए तभी इसका फल प्राप्त होता है।

CHANDRAMOHAN CHOUDHARY
Author: CHANDRAMOHAN CHOUDHARY

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