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आशा कार्यकर्ताओं के अनिश्चितकालीन हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आशा कार्यकर्ताओं ने जड़े ताले, बगैर ईलाज कराए बैरंग लौटे रोगी

आशा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा फैसिलेटरों ने अपने ज्वलंत मांगों को लेकर बुधवार से किया अनिश्चितकालीन हड़ताल। स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई । उग्र आशा कार्यकर्ताओं ने प्रवेश द्वार पर नाकेबंदी कर रोगियों को अंदर जाने तक नहीं दी। बगैर ईलाज के बैरंग लौटे रोगी।

 

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की बुनियाद के रूप में आशा कार्यकर्ता एवं आश फैसिलेटर सेवा देती है। इनकी सेवाओं का ही प्रतिफल है कि सरकारी संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय स्तर तक उपलब्धि हासिल हुई है। मातृत्व शिशु मृत्यु दर में भी राष्ट्रीय स्तर पर कमी के अलावा कई उपलब्धियां हासिल हुई है। अपनी मांगों की पूर्ति के लिए संघ की ओर से समय-समय पर सरकार, स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति को ध्यान ज्ञापन देकर प्रतिनिधिमंडल मिलकर तथा धरना प्रदर्शन जैसी संकेतिक आंदोलन कार्यक्रम द्वारा आकर्षित किया जा चुका है । बिहार विधानसभा के मार्च-अप्रैल सत्र 2023 के दौरान सदन में सरकार द्वारा मासिक मानदेय में वृद्धि करने की घोषणा की गई थी।

 

परंतु आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा फैसिलेटर की मांगों को अनसुना करने से विवश होकर उक्त स्वास्थ्य कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जाने का निर्णय लिया है। बुधवार को अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आशा कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठी। जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई गई है। मरीज बगैर इलाज कराएं स्वास्थ्य केंद्र से बैरंग लौट रहे है। आशा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले अपने 9 सूत्री मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। उनके मांगों में मुख्य रूप से आशा कार्यकर्ता एवं फेसिलेटर को राज्य निधि से 1000 रु0 देय मासिक संबंधी सरकारी संकल्प में अंकित पारितोषिक शब्द को हटाकर अन्य राज्यों की तरह मासिक मानदेय किया जाए और इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जाए । कोरोना काल की ड्यूटी के लिए सभी आशाओं एवं फेसिलेटर को 10,000 रूपये भुगतान किया जाए ।

 

आशा कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा योजना, पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। आशाओं को साड़ी के साथ ब्लाउज पेटीकोट तथा यूनिकोड की व्यवस्था की जाए। इसके लिए देय राशि का भुगतान किया जाए। वर्षों पूर्व विभिन्न कार्यों के लिए निर्धारित प्रोत्साहन राशि की दरों में समुचित वृद्धि हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव एवं प्रेषित किया जाए। आशा कार्यकर्ता एवं फेसिलेटर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दी जाए सहित 9 सूत्री मांग सौपीं। हड़ताल के क्रम में आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी जमकर नारे लगाए।

 

धरना में आशा संघ जिला अध्यक्ष विद्यावत पांडेय, सचिव कुसुम कुमारी, अर्चना किरण, दुर्गावती, अध्यक्ष अनीता देवी, सचिव सीमा कुमारी, कोषाध्यक्ष पुष्पांजलि कुमारी, संध्या कुमारी, रेनू कुमारी, चंद्रकला कुमारी, कुसुम कुमारी, कविता कुमारी, उषा कुमारी उपस्थित थी।

CHANDRAMOHAN CHOUDHARY
Author: CHANDRAMOHAN CHOUDHARY

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