दिल्ली में हैंड्स-ऑन स्प्लिंटिंग कार्यशाला का आयोजन
द न्यूरोएड एंड रिसर्च फाउंडेशन (NRF) के ऑक्यूपेशनल थेरेपी (OT) विभाग ने 02 अगस्त 2026 को जीआईपीएमईआर (GIPMER) के न्यूरोलॉजी विभाग तथा ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थेरपिस्ट्स एसोसिएशन (AIOTA), दिल्ली शाखा के सहयोग से जीआईपीएमईआर ऑडिटोरियम में एक दिवसीय हैंड्स-ऑन स्प्लिंटिंग कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यक्रम में डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता, डॉ. नीरा चौधरी, दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न कॉलेजों के ऑक्यूपेशनल थेरेपी शिक्षक, तथा AIOTA दिल्ली शाखा और दिल्ली काउंसिल ऑफ ऑक्यूपेशनल एंड फिजियोथेरेपी के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यशाला में लगभग 50 ऑक्यूपेशनल थेरेपी छात्रों और पेशेवरों ने भाग लिया। सभी का स्वागत करते हुए एनआरएफ की संस्थापक न्यासी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती राजलक्ष्मी चंद्रू ने कहा कि स्प्लिंटिंग ऑक्यूपेशनल थेरेपी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे सही ढंग से करने के लिए मरीज का सही आकलन, अच्छा क्लिनिकल ज्ञान, रचनात्मक सोच और शरीर की कार्यप्रणाली की समझ आवश्यक है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और उत्तर भारत में स्प्लिंटिंग के अग्रणी विशेषज्ञ डॉ. आर. के. शर्मा ने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों को स्प्लिंटिंग जैसी मूलभूत ऑक्यूपेशनल थेरेपी तकनीकों को सीखने और अपने नियमित अभ्यास में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इन कौशलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में यह विशेषज्ञता अन्य क्षेत्रों में चली जाएगी।
कार्यशाला का संचालन डॉ. शोवन साहा, अतिरिक्त प्रोफेसर, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, मणिपाल कॉलेज ऑफ हेल्थ प्रोफेशन्स, एमएएचई, मणिपाल ने किया। वे इंडियन सोसाइटी फॉर हैंड थेरेपी के अध्यक्ष और IFSHT एजुकेशन कमेटी के सह-अध्यक्ष भी हैं। आठ घंटे की इस कार्यशाला में प्रतिभागियों ने स्प्लिंटिंग के सिद्धांतों को समझा, मरीजों पर लाइव प्रदर्शन देखा और स्वयं स्प्लिंट बनाकर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
एनआरएफ की अकादमिक एवं अनुसंधान प्रमुख डॉ. मोनिका कुंडू (OT) ने कहा कि सही तरीके से बनाया गया स्प्लिंट दर्द कम करने, विकृति रोकने, मरीज की रिकवरी में मदद करने और उसे रोजमर्रा के कार्यों में फिर से सक्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
AIOTA दिल्ली शाखा के प्रवक्ता एवं सह-संयोजक डॉ. नीरज मिश्रा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में सीखने और कौशल विकास को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के लिए अपना सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया।








